निगाहें उठीं तो उसकी नज़र से,
मासूमियत का एक ख़्वाब सा उतर आया...
उसे देखा तो लगा जैसे,
दिल को फिर से प्यार करना आ गया।
उसकी आँखों में वो सादगी थी,
जैसे सुबह की पहली किरण हो...
उसकी मुस्कान में वो जादू था,
जैसे सूखे दिल पर सावन बरस गया हो।
न जाने कैसी कशिश थी उसमें,
जो लफ़्ज़ों से बयान न हो पाई...
बस एक पल उसे देखा और,
ज़िंदगी में एक और मोहब्बत आ गई।
— कवयित्री: मायंग्लंबम मरीना लैमारेम्बी
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